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Showing posts from June, 2012

english thumkey:why every iitian's love story turns out to be a best seller

An idea to write this piece flashed in my mind while i was reading one short article on english of india.it was a cute criticism ,may be an intended one,against the ill-grammatical lines of some novels written by some iitian.more precisely writer was astonished of the fact that 'why every iitians love story turns out as a best seller.It was a point of astonishment for the author,yet it should not be..I feel.
I tell you why
1. In the four or five years that an iitian spend in his/her college the first and foremost thing they are taught are.....how to present,where to present,what to present.the world is like DHRITARASTRA or GANDHARI....in this way or that its blind.....
I wonder how you take our lives...what you think?....we make machines...or robots or skrew nuts...
you will never understand.
Engineering is not all about machines, neither its all about lectures tutorial and practicals.Its like an ideology,a philosophy.its a way of thinking that some times seems analogic to machines.
Tha…

the next diary page

आईने june 21,2012 20:00  ये अँगुली में दबी जिंदगी मेरी माचिस के सहारे जला भी  गये  ।
ये पीने -पिलाने की आदत मेरी
हर घूँट में आँसू मिला भी गये  ।
ये नब्जों की सिहरन,
धक् धक् सी धड़कन
हम जी भी गए ,घबरा भी गये।


ये यादों के साये में नापाक चेहरे
वो सर्दी के रातों के मौसम सुनहरे
वो बातों ही बातों में मिलते गए हम
हाथों में हाथ रख सिलते गए गम
वो गोदी में  तेरे, रैन बसे रे 
हम सो भी गये ,सुला भी गये ।

तुम मीत  जो मन के बन से गये हो
गीत जो प्रीत  के लब्जों से बंधे
हम गा  भी गये , बलखा भी गये ।
दिल से दिल ये मिले  या मिले ना
 नैनों से नैना मिला भी गये ।


तुम आये ना आये हम आते रहेंगे
ये यादों के मोंम जलाते रहेंगे ।
हमको निकालोगे कब कब कहाँ से
हम साये हैं ,बरबस सताते रहेंगे ।
अब यादों में तेरे  जश्न मना के
हम रो भी गये ,रुला भी गये ।

ये राहें जो  बेसुध बेसुध सी हैं
ये  शहर जो सुध बुध खो  बैठी है
इस शहर ए  मुहब्बत जताने की खातिर
हम संवर भी गये ,शरमा भी गये ।

आधे अधूरे ये शहर ये महफ़िल
आधे अधूरे अब हम रहते
छूटा जो  दिल से साथ मेरा
हम क्या कहते ,क्यों कर कहते ।
इक लब्ज ना निकला होठों से
और आँखों में आँसू…

diary pages

may 23 2012
8:00 pm
interview
i sometimes feel that some pacific memories are chasing me.sometimes in dreams every night or sometimes in realities.after every day or two memories interview me.
dear diary
see, i tell you some sober lines i wrote this evening sitting on an embankment road that leads to the setting sun.
 यादों  का सपनों से साक्षात्कार ।
दिन और रात तो ढलते रहेंगे ;
इस्कजादे और शायर तो जलते रहेंगें ।
वक़्त की कहानी हम वक़्त से छुपा रहे हैं ,
प्यारी सी भूल हम  किये जा रहे हैं ।
जिगर के हिसाब में  मिली यादों के लौ का ,
वक़्त बे वक़्त हम  दिया जला रहे हैं ।
कागज जिसमे पोलिथीन की परत सी चढ़  गयी है ,
पत्थर जिसमे पश्चिम की धूल मढ़ गयी है ,
ये ताबूत, ये तम्बाकू, ये सुर, ये सुराही ,
हम गीत बुन रहे हैं
और ये  गाये जा रहे हैं ।
 यादों  का सपनों से साक्षात्कार।
कैसे व्यक्त करें हम आभार ।।
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may 24 2012
8:17 pm
dear diary 
sitting on the embankment i think has turned out to be an inculcated habit.well the hot summer does never allow me to peep…