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Showing posts from July, 2013

इस कमरे की खिड़की से .......

इस कमरे की खिड़की से 
अब वो शाम नज़र नहीं आती है |

ना वो फलक ,ना वो आसमां ,ना वो दौड़ती  लापरवाहियां ;
बस अपने अपने हिस्से की  अपनी अपनी खामोशियाँ;
और निःशब्द आँखें उनकी 
चुप चाप एक  कॊने में बैठी 
कागजों से मन बहलाती है 
इस कमरे की खिड़की से 
अब वो शाम नज़र नहीं आती है ||

और फिर कोई गुलज़ार
किसी दीवार पे लटका कहता जाता है ;
"अपनी  खामोशियों के कुछ टुकड़े हमारी शाम को दे दे;
ये हासिये खींच कर ,
दर्द का  बड़ा अच्छा हिसाब मिलाता है|
फिर  भी कुछ बातें  ऐसी है 
जो रह रह कर रह जाती है |
इस कमरे की खिड़की से 
अब वो शाम नज़र नहीं आती है ||

आप इस मचलती बारिस के बदनाम यायावर सही

हमारे मर्ज़ का इलाज तो आपके पास है ||

हम संभलते हैं ..और फिर से गिर जाते हैं
बताईये आपकी नज़रों में कुछ तो ख़ास है ||

ये बेवजह हमें दवाइयां देते हैं
हमारे मर्ज़ का इलाज तो आपके पास है ||

मुझे बरबाद करने के लिए ये डर ही काफी है ||

वो दो वक़्त में हकीकत से अफ़साने बन जाएँ
मुझे बरबाद करने के लिए ये डर ही  काफी है ||

इस शहर में मेरा कोई पराया तो नहीं
फिर भी मुझे जलने को ये शहर ही  काफी है ||

जोश ए जूनून  होश ए रुतबा ही सब कुछ तो नहीं
मुहब्बत करने वास्ते जिगर ही काफी है ||

वो कहाँ हैं ,कैसे हैं किस हालत में जी रहे हैं
मुझे संवारने के वास्ते ये खबर ही काफी है ||

आप किस गली के किस दरवाजे में छुपे हैं ,क्या मालुम
हम इस मचलती धूप के बदनाम यायावर ही काफी हैं ||

काफी है होठों का होठों से इनकार का सबब
उनको मनाने के लिये तो एक  नज़र ही काफी है ||




HOW THIS SERIAL BLAST SCREWED MY LITTLE LIFE

"On 7th July, 2013 at around 5.15 a.m. a low intensity bomb blast took place in the 1500 year old Mahabodhi Temple complex. This was followed by a series of eight low intensity blasts and at least two monks are reported to be injured, one Tibetan and the other Myanmarese. The serial blasts did not cause any damage to the temple and the tree under which Buddha attained enlightenment. Two other bombs, one under the 80 feet statue of Buddha and the other near Karmapa Temple were defused by the police." Quotes wikipedia.
Quite nerving it is that our security algorithm failed to defend .No major  fatalities anyway ..that is the good news.
Manmohan Singh read the same old lines of regret that talks about intolerance in an ironically meek baritone. "Our composite culture and traditions teach us respect for all religions and such attacks on religious places will never be tolerated." Anyway I have no issue with this .Its quite a constant phenomenal statement of subject verb di…

WHY I DON'T SAY "I LOVE YOU TOO" FAIRLY OFTEN.

Misinterpretation is a criminal which puts me to introspection quite often .
The concerned subject I feel has time and again , knowingly or unknowingly  takes it as an issue that "why I don't say "I love you too " fairly often .The concerned subject feels that I am shy .Of course I am .Its shyness that fetch you the maximum of love .But its not the reason why I don't.
Truth is that when the concerned subject  says "I love you " I am quite busy in getting loved .The state of getting loved and loving has a very thin line difference which normal people fail to recognize. Its not that I don’t have word .Rather I have the cutest of words available in the lexicon. But my words get stained with the concerned subject's loveliness. Its concerned subject's love that occupy every void, every thing , every murmur , every aroma .So instead of responding I jot my words into an endless necklace for the concerned subject's white hands ,smooth as grapes. &l…

कभी कभी शाम ऐसे भी ढलती है |

कभी कभी शाम ऐसे   भी  ढलती है  |
जलते कर्कटों से धुआ उठता है ;
क्षितिज से
मध्यम सा इक हवा उठता है ;
जागते सोते  लम्हों में
दर्द का इक सिलसिला उठता है ;
फिर मरहम औ पट्टी लिये
ठंढा सा इक  चंदा  उठता है ||

फिर शुरु होता है :
आरोप - प्रत्यारोप का इक दौर |
टूटे - बिखरे तारों  का इक  काफिला |
बेनजीर मुहब्बत का बेनजीर सिलसिला |
दीवारों में दरारें ; दरारों  में दीवारें |
बेइमान कवायदें , बेसाज इरायदें
और बेजॊर अफसानों का पन्ने भर का हिसाब ;
एक कशमकस
और कशमकस से जन्म लेता आंसुओं का एक सैलाब;
जो इस इमारती समाज के लिये आइने से कम नहीं ||
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और इन् सब के बहुत बाद तुम आती हो|
एक  नन्ही सी, प्यारी सी
 ख्वाइश आती है ;
एक  नन्हा सा प्यारा सा
एहसास आता है -
की शाम अभी भी ढलने को है |