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Showing posts from August, 2016

चीन की दीवार

मेरे साथ चलोगी क्या
चाँद पर
साथ साथ चाँद पर चलेंगे
और चाँद से चीन की दीवार देखेंगे |

खैर
चीन की दीवार है;
चीन जाके भी देखी जा सकती है
लेकिन फिर काफी बड़ी नज़र आएगी,
हमारी बाहें उन्हें आंक नहीं पाएंगी
हमारी नज़रें उसे एक टक में समेट नहीं पाएंगी
और
हमारी मुहब्बत उसके सामने नाचीज़ सी लगेगी |

इतने विस्तृत जमीं
और
इतने फैले आसमान में
उस चीन की दीवार का इतना भी क्या वजूद ?
जैसी भी है
है तो एक दीवार ही
किसी के मुहब्बत से बड़ी कैसे हो सकती ?

इसीलिए कहता हूँ
मेरे साथ चलोगी क्या
चाँद पे
वहीँ से चीन की दीवार देखेंगे
और फिर खिलखिला के हँसेंगे
"हमारी मुहब्बत के सामने
कितनी  नाचीज़ सी है चीन की दीवार" |

तोमाय हृद मझार राखिबो छेड़े दिबो ना

पिछले चंद दिनों से एक टेक्नोलॉजी ब्लॉग तैयार कर रहा था और इन चंद दिनों में मैंने ना जाने कितने टेक्स्ट नज़रअंदाज कर दिए जिसमें लिखा आता था "तुम्हारी पोएट्री नहीं आ रही आजकल" | टेक्नोलॉजी ब्लॉग तैयार हो गया है, अभी व्हाट्सएप्प ग्रुप पे घूम रहा है, टेस्टिंग पीरियड में है समझिये | एक दिन पब्लिक में भी लाएंगे तो इत्तला करेंगे | फिलहाल ये एक  कुछ कुछ गजल जैसा पढ़िए | "ह्रदय के मझधार" इस खूबसूरत लफ्ज़ की प्रेरणा मुझे एक बंगाली गीत से मिली जिसके बोल हैं : "तोमाय हृद मझार राखिबो छेड़े दिबो ना" | इस एक गजल से मैं "क से कलकत्ता" नाम का एक सीरीज शुरू कर रहा हूँ जिसमें ऐसी नज़्में, कवितायेँ, गजल लिखी जायेगी जो कहीं कहीं ना कहीं कलकत्ता के गीतों से, या फिर गलियों से प्रेरित होंगी | ये सिलसिला चलता रहेगा | फिलहाल गजल पढ़िए


ह्रदय के मझधार  में रखूँगा मैं तुझे
कुछ इस तरह से प्यार मैं रखूँगा मैं तुझे ||

जिंदगी जश्न हो या हो कू-ए-तिश्नगी
हर दौड़ के सरकार में रखूँगा मैं तुझे ||

तुम मेरे किस्से में दर्ज रहो न रहो
अपने हर एक अशआर में रखूँगा में तुझे ||

वो एक दुकां, जिसमे…

इतिहास*

'तुम खूबसूरत हो' ये मैं तुम्हें तब तब कहूँगा जब जब मेरा दिल करेगा । 'तुम खूबसूरत हो' मैं ये तुम्हें तब भी कहूँगा जब जब तुम्हें जरुरत होगी । जब बिन मौसम बरसात होगी मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' जब शायरी की बात होगी मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' जब तुम्हारे चेहरे पे धूप आएगी मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' जब चलते चलते रुक जाओगी चेहरे कुम्हला जाएँगे मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' तब जबकि शाम होगी बत्तियां आधी बुझी होगी मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' तब जबकि रात होगी सितारों की बारात होगी मैं कहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।' तुम सुनते सुनते ऊब जाओगी लेकिन मैं कहता रहूँगा 'तुम खूबसूरत हो ।'
मुझे नहीं मालुम तुम कितनी सच हो कितनी परिकल्पना | मुझे नहीं मालुम तुममें कितना जमीन है और कितना आसमां । मुझे नहीं मालुम तुम हो कहाँ और मैं हूँ कहाँ | मुझे बस इतना मालुम है की तुम खूबसूरत हो और इस बात को इतिहास में दर्ज करना मेरी जिम्मेदारी है ।। *नज़्म साराह के की पोएट्री " व्हेन लव अराइवेस "…